एक आदमी था जिसने एक चेक की तारीख को खुरचकर आज की तारीख में बदल दिया। फिर उसने असली चेक पर लिखी चीज़ें काटकर नई चीज़ें चिपका दीं ताकि चेक असली लगे। उसने सोचा कि अब बैंक से पैसे मिल जाएंगे, लेकिन जब वह बैंक गया तो कैशियर ने फौरन समझ लिया कि चेक नकली है। उसकी मासूम शक्ल का भी कोई फायदा नहीं हुआ — उसे पाँच डॉलर तक नहीं मिले।

निराश होकर वह सड़क पर चलने लगा। तभी उसने देखा कि कुछ पायलट लोग अपनी यूनिफॉर्म में बड़े रौब से चल रहे हैं। उनके साथ एयर होस्टेस थीं, बच्चे उनसे ऑटोग्राफ ले रहे थे, और बैंक का मैनेजर भी उनका स्वागत कर रहा था। यह देखकर आदमी को जलन हुई और उसने सोचा कि अब वो भी पायलट बनेगा।

उसने झूठ बोलकर खुद को एक अखबार का रिपोर्टर बताया और एयरलाइन की अंदर की जानकारी लेने लगा। अब उसे एक पायलट यूनिफॉर्म चाहिए थी। उसने कहा कि उसकी पुरानी यूनिफॉर्म खराब हो गई है, इसलिए नई बनवा रहा है। पैसे न होने पर वह फिर से नकली चेक से भुगतान करना चाहता था, लेकिन दर्जी ने कहा कि बस कर्मचारी नंबर दो, कंपनी खुद पैसे दे देगी।